भारत का दक्षिणी हिस्सा किस कटिबंध के अंतर्गत आता है ?


भारत बहुत ही विशाल देश है, पूर्व से लेकर पश्चिम तक और उत्तर से ले कर दक्षिण तक काफी फैला हुआ है उसी प्रकार यहां का तापमान भी भिन्न भिन्न होता है। भारत में बर्फीले पहाड़ भी है और गर्म रेगिस्तान भी है यहां बहुत से वर्षा वन भी है और सूखे पड़े मैदान भी। हर परिस्तिथि में इंसान रहना सिख गया है अपना गुज़ारा करने के लिए जीवन जीने के लिए हर तरह के तापमान में इंसान रह रहा है। भारत के विशाल होने के कारण उससे हिस्से अलग अलग कटिबन्ध के अंतर्गत आते है तो आज हम जानेगे की भारत का दक्षिणी हिस्सा किस कटिबंध के अंतर्गत आता है ? और कटिबंध कितने प्रकार के होते है ? और भी बहुत कुछ ।

कटिबंध का अर्थ

कटिबन्ध से अर्थ है कि प्रत्येक गोलार्द्ध को ताप के आधार पर कुछ भागों में बाँटा गया है, इन भागों को ही ‘कटिबन्ध’ कहा जाता है। पृथ्वी के अलग अलग क्षेत्रों में सूरज की किरणे कितनी लम्बवत गिरती हैं, यह उस स्थान की भूमध्य रेखा से दूरी पर आधारित होती है।

कटिबंध

भारत का दक्षिणी हिस्सा किस कटिबंध के अंतर्गत आता है

भारत के मध्य से हो कर कर्क रेखा गुज़रती है जिस कारण भारत का दक्षिणी हिस्सा उष्णकटिबंध और उत्तरी हिस्सा उपोष्ण कटिबंध या कोष्ण शीतोष्ण कटिबंध के अंतर्गत आता है। भारत का अधिकांशतः भाग उष्ण कटिबंध के अन्तर्गत आता है क्योकि विषुवत रेखा से 30° अक्षांश के मध्य या कर्क रेखा से मकर रेखा के मध्य उष्ण कटिबंध और 30°-45° अक्षांश के मध्य उपोष्ण कटिबंध पाया जाता है। भारत का अक्षांशीय विस्तार 6°4′ से 37°6′ उत्तरी अक्षांश पर है।

कटिबंध कितने प्रकार के होते हैं?

कटिबन्ध निम्न प्रकार के होते हैं-

  • ऊष्ण कटिबन्ध
  • उपोष्ण कटिबन्ध
  • शीतोष्ण कटिबन्ध
  • ध्रुवीय कटिबन्ध

ऊष्ण कटिबन्ध


ऊष्ण कटिबंध विषुवत रेखा से 23 1/2%° उत्तर और 23 1/2%° दक्षिण के बीच का भाग होता है । जो उत्तर में कर्क रेखा और दक्षिण में मकर रेखा के बीच भूमध्य रेखा के समीप स्थित है। इस रेखा पर सूर्य ठीक सिर के ऊपर ही होता है। यहाँ का वातावरण मच्छरों के लिए अनुकूल होता है इसलिए यहाँ बहुत सी बीमारियाँ होती है। ऊष्ण कटिबंध को ख़ास कर छः वन समूहों में विभजित किया गया है जो इस प्रकार है आर्द्र उष्णकटिबंधीय वन, शुष्क उष्णकटिबंधीय, पर्वतीय उप-उष्णकटिबंधीय, उप-अल्पाइन, उप शीतोष्ण तथा शीतोष्ण ।

शीतोष्ण कटिबन्ध

शीतोष्ण कटिबन्ध, ऊष्णकटिबन्ध और शीत कटिबन्ध के बीच का इलाका होता है। यह क्षेर्त खेती के लिए अनुकूल होते है। यह क्षेत्र समुर्द से दूर हो सकते है जैसे मध्य एशिया और मध्य उत्तरी अमेरिका आदि।

उपोष्ण कटिबन्ध

उष्णकटिबंधीय क्षेत्र के तुरंत उत्तर तथा दक्षिण से सटकर लगे हुए क्षेत्र को कहते हैं  । उष्णकटिबंधीय क्षेत्र के सटीक उत्तर तथा दक्षिण से लगे हुए क्षेत्र को उपोष्णकटिबन्ध कहा जाता है। यह क्षेत्र अमूमन दोनों गोलार्धों में २३.५° से लेकर ४०° तक के अक्षांशों में होता है। यह क्षेत्र सर्दियों से अधिक संबंध रखते है। यहां ठंडे महीने में तापमान 6° से. 18° . के बीच हो सकता है। यहाँ शंकु आकर के पेड़ पाये जाते है जो ठन्डे घाटी क्षेत्र और पहाड़ी क्षेत्र पर आप ने देखे होंगे।

ध्रुवीय कटिबन्ध

ध्रुवीय कटिबन्ध उस कटिबन्ध क्षेत्र को कहा जाता है , जो 66º से 90º के मध्य स्थित है। यह पृथ्वी के उस क्षेत्र में आता है जहा हमेशा ही ठंडी ही रहती है। बर्फीले क्षेत्र अधिकतर इन्ही क्षेत्रो में पाए जाते है।

दक्षिण भारत से संबंधी जानकारी

दक्षिण भारत की जनसंख्या लगभग 25 करोड़ के आस पास है। दक्षिण भारत में कुल 5 राज्य आते है कर्नाटक तमिलनाडु तेलंगाना केरल और आन्ध्र प्रदेश। कर्नाटक दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा जनसंख्या चेन्नई, बंगलौर, कोच्चि मैसूर आदि शहरो में निवास करती है। दक्षिण भारत के क्षेत्र पर्यटन के हिसाब से भी काफी अच्छे है और यहाँ की संस्कृति भी काफी प्रसिद्ध और देखने लायक है। इस क्षेत्र की भाषाए भी दक्षिण भारत को दूसरे भारतीय क्षेत्र से अलग और अनोखी छवि प्रदान करती है।

कर्क रेखा और मकर रेखा क्या है

यह दोनों काल्पनिक रेखाए है, कर्क रेखा पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में विषुवत रेखा के सामानांतर उत्तर में पश्चिम से पूर्व की ओर खींची हुई है यह अक्षांश रेखा है। यह पृथ्वी की पांच प्रमुख अक्षांश रेखाओं में से एक है जो पृथ्वी के मानचित्र पर दर्शायी गयी है। । इसे इंग्लिश में Tropic of Cancer कहते हैं। कर्क रेखा की स्थिति स्थायी नहीं होती है। यह समय के साथ साथ बदलती रहती है। ये रेखा संयुक्त राज्य अमेरिका, मैक्सिको, बहमास, पश्चिमी सहारा ( मोरक्को), मुरितानिया, माली, अल्जीरिया, नाइजर, लीबिया, चाड, मिस्र, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, भारत, बांग्लादेश,म्यांमार, चीन, ताइवान से गुजरती है।
मकर रेखा को अंग्रेजी में Tropic of Capricorn कहते है। मकर रेखा पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्ध में विषुवत रेखा के सामानांतर खींची गयी अक्षांश रेखा है। मकर रेखा धरती की दक्षिणतम अक्षांश रेखा है जिस पर सूर्य दोपहर के समय लम्बवत चमकता हुआ दिखता है ।

कुछ और महत्वपूर्ण लेख –

0Shares

Leave a Comment