चुनाव में लोगों की भागीदारी क्यों आवश्यक है उत्तर


भारत एक प्रजातान्त्रिक देश है जहां प्रजा का प्रजा के लिए प्रजा के द्वारा शासन चलाया जाता है। हमारे देश की जनसंख्या और इसका क्षेत्रफल काफी अधिक होने के कारण यहाँ पर हर क्षेत्र के बारे में विचार करने, वहां की व्यवस्था को बनाये रखने हेतु लोकनायकों का चुनाव किया जाता है। मोहल्ले के पार्षद से लेकर सांसद तक को चुनने का अधिकार जनता को होता है। आज हमारे पास एक प्रश्न आया कि चुनाव में लोगों की भागीदारी क्यों आवश्यक है का उत्तर आपको आज इस पोस्ट में जानने को मिलेगा।

चुनाव में लोगों की भागीदारी क्यों आवश्यक है?

प्रजातान्त्रिक देशों में जनता द्वारा ही अपना प्रतिनिधि चुना जाता है। इसलिए लोगों की भागीदारी इसमें बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस विषय पर प्रकाश हम निम्न बिंदुओं के आधार पर डाल सकते हैं।

  • जैसे बून्द बून्द से घड़ा भरता है उसी प्रकार केवल एक वोट से कोई नेता चुनाव जीत या हार सकता है। इसलिए यदि आप सोचते हैं आपके अकेले के वोट से क्या होगा तो आप गलत हैं।
  • काफी सारे कार्य ऐसे होते हैं जिन्हें जनता स्वयं से नहीं कर सकती। इसके लिए उन्हें शासन प्रशासन की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में यदि उनके द्वारा चुना हुआ एक अच्छा नेता उनके साथ हो तो कार्यों की प्रगति जल्द से जल्द होती है।
  • चुनाव का अर्थ ही है “किसी को चुनना” और यहां पर अलग-अलग नेता चुनाव लड़ते हैं उनमें से योग्य उम्मीदवार को लोगों द्वारा चुना जाता है।
  • लोगों के कल्याण हेतु ही सरकारें बनती हैं। ऐसे में यदि लोग अपने लिए सही सरकार चुनने में दिलचस्पी नहीं लेगी तो भविष्य अंधकार में ही जायेगा।
  • परिवारशाही, राजशाही एवं तानाशाही से जनता बची रहती है।

निष्कर्ष:

हमारा देश एक लोकतान्त्रिक देश है जहां जनता ही अपने लिए नेताओं को चुनती है। जनता के बिना चुनाव करना संभव ही नहीं है। उम्मीद है अब आपको आपके प्रश्न चुनाव में लोगों की भागीदारी क्यों आवश्यक है उत्तर मिल गया होगा।

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