कबूतर को संस्कृत में क्या कहते हैं?


कबूतर एक ऐसा पक्षी है जो आसानी से देखा जा सकता है जो अधिकांश आसमान उड़ता हुआ दिखाई पड़ता है। यह एक सुंदर पक्षी है जिसका छोटा सर तथा सफेद और स्लेटी रंग होता होता है, इन्हें खाने में  अनाज, फल, दालें और बीज पसंद होते है, अनाज, मेवे और दालें इसका मुख्य भोजन हैं। यह बहुत ही शांत स्वभाव का पक्षी है इसीलिए इसे शांति का प्रतीक माना जाता है इसे बहुतायत में पाला जाता है यह एक पालतू पक्षी है। इनका प्रयोग पुराने समय में चिट्ठी भेजने के लिए किया जाता था क्योकि कबूतर कभी भी अपना मूल स्थान नही भूलता है, कबूतरों को मनुष्यों के बिच रहना बहुत पसंद है और ये झुण्ड में रहते है। इनकी अलग अलग प्रकार की नस्ले है जो रेगिस्तान, बर्फ आदि जगह है। इस लेख में कबूतर को संस्कृत में क्या कहते हैं यह बताया गया है।

कबूतर को संस्कृत में क्या कहते हैं?

कबूतर को संस्कृत में कपोत: कहते हैं। आज के समय में भी कबूतरों को पाला जाता है, कबूतर हमे बहुत सी जगहों पर दिखाई पड़ सकते है जैसे आँगनो में, छतो पर, नदियों के आस पास आदि।

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