लाल बहादुर शास्त्री के प्रेरक प्रसंग


एक महापुरुष जिन्होंने देश भक्ति में अपना पूरा जीवन बिता दिया। इस लेख में आपको लाल बहादुर शास्त्री के प्रेरक प्रसंग पढ़ने को मिलेंगे।

लाल बहादुर शास्त्री के प्रेरक प्रसंग

खादी के प्रति अनुराग

लाल बहादुर शास्त्री को शादगी की मूरत माना जाता है, वे हमेशा से ही साधारण व्यक्तित्व वाले राजनेता रहे हैं। एक बार की घटना है जब शास्त्री जी के पुराने कपडे छाटे जा रहे थे तभी कई फटे पुराने कुर्ते निकल कर अलग कर दिए गये थे पर शास्त्री जी ने जब यह देख तो कहा ‘अब नवम्बर आयेगा, जाड़े के दिन होंगे, तब ये सब काम आयेंगे। ऊपर से कोट पहन लूँगा न।’

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कहा जाता है कि उनका खादी के प्रति अनुराग था और जब उन्होंने यह कपडे समेटे तब यह भी कहा कि ‘ये सब खादी के कपड़े हैं। बड़ी मेहनत से बनाए हैं बीनने वालों ने। इसका एक-एक सूत काम आना चाहिए।’

उनकी पुस्तक ‘लालबहादुर शास्त्री, मेरे बाबूजी’ उनके बेटे के द्वारा लिखी गयी थी जिसमे इस प्रकार की और कई घटनाओ का जिक्र है।

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उफनती नदी भी न रोक सकी

वेसे तो लाल बाहादुर शास्त्री जी अपने कोमल व्यवहार की वजह से जाने जाते हैं पर यह एक साहसी तथा निडर व्यक्तित्व भी रखते थे। एक बार की बात है जब शास्त्री जी अपने दोस्तों के साथ मेला देखने जा रहे थे पर उनके पास बिलकुल भी पैसे नही थे पर वह मेला देखने जाना चाहते थे, जैसे ही वो मेला देखने के लिए निकले तो रास्ते में एक गहरी और तेज बहाव वाली नदी पड़ती थी। जिसे नाव के द्वारा ही पार किया जाता था पर शास्त्री जी के पास बिलकुल भी पैसे नही थे वह अपने दोस्तों से पैसे नही ले सकते थे क्योकि उनका स्वाभिमान उन्हें ऐसा करने से रोक रहा था। फिर हुआ कि उनके साथ वाले लड़के नाव में बैठ कर उनकी आखो के सामने मेले की तरफ बड़ रहे थे।

उस नदी की लहरों को देख कर कोई बड़े से बड़ा तेराक भी इस नदी को पार करने में हजार बार सोचेगा पर लाल बहादुर शास्त्री ने इस नदी को पार करने का मन बना लिया था और यह उफनती नदी भी न रोक सकी इस बहादुर बालक हो।

जब दुकानदार चौक गया

एक बार शास्त्री जी साड़ी की दुकान पर गये और दुकानदार से साड़ी दिखने के लिए कहा, दुकानदार ने साड़ियाँ दिखाना शुरू किया था तभी शास्त्री जी ने उनका दाम पूछा तभी दुकानदार ने कहा कि आप यहा आये यह ही हमारे लिए सौभाग्य की बात है आप दाम न देखो, यह सुन कर शास्त्री जी ने कहा कि मुझे आपकी दुकान की सबसे सस्ती साड़ी दिखाओ और उसके दाम भी बताना क्योकि में बिना पैसे के आपसे कुछ नही खरीदूंगा।

फिर दुकानदार उन्हें अच्छी और सस्ती साड़ियाँ दिखाता है उसमेसे शास्त्री जी कुछ साड़ियाँ खरीदते हैं और दुकानदार को पैसे दे कर वहा से चले जाते हैं यह सादगी देख कर वहा मोजूद हर इन्सान दंग रह जाता है कि देश का इतना बड़ा नेता कितना साधारण जीवन जीता है।

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जब माली ने उठाया शास्त्री जी पर हाथ

शास्त्री जी की उम्र जब छः वर्ष थी तब वह अपने दोस्तों के साथ खेल रहे थे तभी उन्होंने मिल कर एक बगीचे से फूल चुराने का फैसला लिया और वे बगीचे में जा कूदे, सभी बच्चो ने अच्छे खासे फूल तोड़ लिए पर शास्त्री जी उन सब में सबसे छोटे थे उन्होंने पहला फूल तोडा ही था कि वहा माली आ पहुचा शास्त्री जी के साथ वाले वहा से भागने में सफल रहे पर वह उस माली के हाथ आ गये, माली बहुत ही क्रोध में था और वह इन सभी बच्चो को जानता था फिर भी उसने शास्त्र को पीट दिया।

मार खाने के बाद भी उनकी आँखों में आसूं नही थे और उन्होंने उस माली से कहा कि “आप मुझे इसलिए पीट रहे हैं क्योंकि मेरे पिता नहीं हैं!”

और यह सुन कर माली ने शास्त्री जी को जवाब दिया कि “बेटे, पिता के न होने पर तो तुम्हारी ज़िम्मेदारी और अधिक हो जाती है।” यह सुन कर शास्त्री जी की आखों में आसू आ गये और उन्होंने इस बात की गंभीरता को समझा और उन्होंने निश्चय किया कि वे अब से अपने परिवार और देश के लिए ही काम करेंगे और अपनी जिम्मेदारियों को समझेंगे, जिसके बाद समय समय पर वह सामाजिक कामो में हिस्सा लेने लगे और स्वतंत्रता प्राप्ति के आन्दोलन में भी अपनी भूमिका निभाई और आगे चल कर देश के प्रधानमंत्री तक बन गये।

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