पृथ्वी को नीला ग्रह क्यों कहा जाता है?


आज हम पृथ्वी से सम्बन्धित जानकारी साझा करने वाले है तो आइये शुरू करते है अभी तक की जानकारियों के मुताबिक इतने बड़े ब्राह्मण में केवल पृथ्वी पर ही जीवन है यह ज्ञात है पर वैज्ञानिको का मानना है कि केवल पृथ्वी एक मात्र ऐसा गृह नही है जहां जीवन है इस अन्तरिक्ष में कही दुरी जरुर जीवन अवश्य होगा पर वर्तमान में हम उसे खोज नही सके हैं किन्तु भविष्य में जरुर यह सम्भव होगा की हम किसी और गृह पर जीवन खोज ले। आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे की पृथ्वी को नीला ग्रह क्यों कहा जाता है?

पृथ्वी को नीला ग्रह क्यों कहा जाता है?

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी पर जीवन होने का सबसे बड़ा कारण है बहुतायत में धरती पर पानी का मोजूद होना, बिना पानी के जीवन सम्भव नही है। हमारी पृथ्वी का 71 प्रतिशत हिस्सा पानी से घिरा हुआ है और बाकि जगह पर हम रहते है एवं पानी नील रंग का होता है इसलिए अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी नीले रंग की दिखाई पड़ती है यही कारण है कि पृथ्वी को नीला ग्रह कहा जाता है।

जानकारी के लिए आप को बतादें कि सौरमण्डल के अन्य ग्रहों पर भी अल्प मात्रा में जल मोजूद है।

  • बुध गृह पर भाप के रूप में 3.4 प्रतिशत
  • शुक्र ग्रह के वायुमण्डल में 0.002 प्रतिशत
  • मंगल ग्रह के वायुमण्डल में 0.03 प्रतिशत
  • बृहस्पति ग्रह के वायुमण्डल में 0.00004 प्रतिशत

उत्तर: जब केवल सूर्य अस्तित्व में था और उसका कोई सौर मंडल नहीं था तो पानी का कोई अस्तित्व नहीं था। उसके बाद हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिलने से पानी का निर्माण हुआ था। अपने जन्म के करोड़ों वर्षों तक पृथ्वी बहुत गर्म थी। तब पानी का अस्तित्व जलवाष्प के रूप में था। जब पृथ्वी ठंडी हुई तो पानी का अस्तित्व बर्फ के रूप में परिणत हो गया। उसके बाद पानी अपने तरल रूप में आ गया।

पानी की उत्पत्ति कैसे हुई?

पृथ्वी के जन्म के समय वह बहुत गर्म थी यह जलते हुए एक पिंड की तरह थी । अपने जन्म के करोडो वर्षो बाद धरती पर पानी की उत्पति हुई। पानी के अणु का निर्माण 2 हाइड्रोजन (Hydrogen) और 1 ऑक्सीजन (Oxygen) के मिलने हुआ है। इसलिए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को पानी का पूर्वज या पुरखा कहा जाता है। जल के बिना हम जीवित नही रह सकते हैं हमरे शरीर को जीवित रहने आवर कार्य करने के लिए पानी की जरूरत होती है। हमारे देनिक कामो में भी पानी बहुत महत्व रखता है जैसे खाना बनाना, साफ सफाई करना आदि।

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