योग के पिता के रूप में कौन जाना जाता है – Yog Ke Pita Ke Roop Mein Kaun Jana Jata Hai?


योग आत्मा का परमात्मा से मिलन है। प्राचीन काल से ही भारत में शरीर को चुस्त, दुरुस्त और फुर्तीला बनाने हेतु योगाभ्यास किया जा रहा है। प्रतिदिन योगाभ्यास करने से बीमारियां शरीर से दूर रहती हैं। योग में कई ऐसे आसन हैं जो आपके शरीर में उतपन्न हुई बीमारियों को भी जड़ से मिटाने में सक्षम हैं। आईये जानते हैं योग के बारे में और योग के पिता के रूप में कौन जाना जाता है – Yog Ke Pita Ke Roop Mein Kaun Jana Jata Hai?

योग क्या है?

Yoga Kya Hai: योग का निर्माण संस्कृत भाषा के ‘यूज धातु’ से हुआ है। इसका अर्थ होता है आत्मा का परमात्मा से मिलन। योग साधना में इतनी शक्ति होती है कि यह आपके शरीर से कई रोगों, विकारों से दूर कर सकता है। यह एक प्रकार का आध्यात्मिक अनुशासन है जिसे आत्मसार कर जीवन को सफल बनाया जा सकता है। पुरुष योग साधकों को योगी एवं महिलाओं को योगिनी कहा जाता है। योग के कई प्रकार एवं शैलियां होती है जैसे कुंडलिनी योग, अष्टांग योग, हठ योग, आराम योग, पावर योग, जीवमुक्ति योग आदि।

योग के पिता के रूप में कौन जाना जाता है

Yog Ke Pita Ke Roop Mein Kaun Jana Jata Hai: यदि आपके मन में कहीं से यह सवाल आया है कि योग का जनक कौन है इसके पिता के रूप में कौन जाना जाता है तो इसका उत्तर है योग के पिता आदियोगी शिव हैं। प्रभु शिव 15000 से भी कुछ वर्ष पूर्व, सभी धर्मों के पूर्व आदियोगी बनकर हिमालय पर प्रकट हुए जहां उन्होंने सात साधकों को योग की दीक्षा दी। इन साधकों ने पुरे चौरासी वर्षों तक योग साधना की एवं उसके बाद आदियोगी ने उनका निरिक्षण करने के पश्चात् अलग अलग दिशाओं में योग शिक्षा को फैलाने के लिए भेज दिया।

इसके अलावा आधुनिक योग का जनक महर्षि पतंजलि को माना जाता है।

आज आपने जाना कि योग के पिता के रूप में किसे जाना जाता है (who is the father of yoga)। ऐसे ही रोचक सवालों के जवाब जानने के लिए बुकमार्क कीजिये हमारी साइट और जुड़े रहिये ज्ञानग्रंथ से।

FAQs

भारत में योग कब शुरू हुआ?

भारत में योग का इतिहास 15000 वर्षों एवं सभी धर्मों से पुराना है। आदियोगी शिव के द्वारा दी गयी ये शिक्षा आज भी मानव जीवन के लिए अमृत का काम कर रही है।

योग के जन्मदाता देश कौन सा है?

योग का जन्म भारत वर्ष में हुआ है। यही एकमात्र ऐसा देश है जहां संस्कृति, विज्ञान, मानव विकास को शुरू से ही बढ़ावा दिया जाता है एवं भारत को विश्व गुरु भी कहा जाता है।

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