योगिनी एकादशी की कहानी


नमस्कार दोस्तों ! इस लेख में आप जानेंगे कि योगिनी एकादशी का व्रत रखने से क्या लाभ होता है और आपको योगिनी एकादशी की कहानी भी पढ़ने को मिल जाएगी।

योगिनी एकादशी के लाभ

हर वर्ष हिन्दू कालान्तर के अनुसार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस वर्ष यानिकी 2023 में यह तिथि 14 June को आ रही है। इस एकादशी पर व्रत रखने पर आपको दुखों से मुक्ति मिलती है, मृत्यु के बाद व्यक्ति को मोक्ष मिलता है , 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने का फल मिल जाता है आदि। योगिनी एकादशी को भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है और इस व्रत के पीछे एक कहानी भी है जो आपको आगे पढने को मिल जाएगी।

योगिनी एकादशी की कहानी

अलकापुरी नगरी के राजा कुबेर जो स्वर्ग धाम में रहते थे और प्रतिदिन शंकर भगवान की पूजा करते थे। कुबेर देव भगवान शिव को फूल अर्पित भी किया करते थे और यह फूल उन्हें हेम नाम का एक माली ला कर दिया करता था। हेम शादीशुदा था जिसकी विशालाक्षी नाम की एक सुंदर स्त्री थी। एक दिन वह माली अपनी पत्नी के साथ हास्य-विनोद करने लगा और कुबेर देव को फूल देने का समय बीतता गया वहां कुबेर देव हेम माली की प्रतीक्षा में क्रोधित होते जा रहे थे।

जब ज्यादा समय हो गया और दोपहर होने लगी जब कुबेर देव ने अपने सेवको को माली के घर भेजा और कहा की पता कर कर आओ की माली आज क्यों नही आया है। जब सेवकों को पता लगा की वह अपनी पत्नी के साथ अतिकामी है और हास्य-विनोद में लिप्त है तो उन्होंने कुबेर देव को बताया यह सुन कर कुबेर देव और भी क्रोधित हो गये और उस माली को जल्द से जल्द उनके पास बुलाया और उसे श्राप दे दिया कि तुमने मेरे शिव का अनादर किया है में तुम्हे श्राप देता हु कि तू स्त्री का वियोग सहेगा और मृत्युलोक में जाकर कोढ़ी होगा।

इस श्राप के बाद वह माली कोढ़ी हो गया और उसकी पति भी अंतर्ध्यान हो गयी और इस मृत्यु लोक में वह भटकता रहा, फिर एक दिन वह माली मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम पंहुचा और इस श्राप से मुक्ति के उपाय पूछने लगा, तभी मार्कण्डेय ऋषि ने उसे कहा ही अगर तुम आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी नामक एकादशी का व्रत करोगे तो तुम्हारे सारे दुःख खत्म हो जाएगे। फिर उस माली ने ऐसा ही किया और विधि विधान से इस व्रत को करने लगा और पाप मुक्त हो गया।

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