पीएफआई क्या होता है? सरकार क्यों लगा रही है इस पर प्रतिबन्ध?


आज के इस आर्टिकल में हम आपको पीएफआई से जुड़ी जानकारियाँ बताने वाले हैं जैसे की पीएफआई क्या होता है? और सरकार इस पर प्रतिबन्ध क्यों लगा रही है?

पीएफआई क्या होता है?

पीएफआई एक इस्लामिक संगठन है जिसका फुल फॉर्म पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया है। इस संगठन का कहना है कि यह देश के मुसलमानों के हक की बात करने और आवाज़ उठाने वाला संगठन है। पीएफआई की स्थापना 22 November 2006 को हुई थी। यह संघठन तीन मुस्लिम संगठनों के मिलकर बना है इनमें केरल का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु का मनिथा नीति पसराई शामिल थे। यह तीन संगठन 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में बनाये गयें थे। वर्तमान समय आते आते पीएफआई लगभग 16 राज्यों में बरक़रार है और 15 से ज्यादा मुस्लिम संगठन इससे जुड़ चुके है।

सरकार क्यों लगा रही है इस पर प्रतिबन्ध?

यह संगठन हमेशा से ही विवादों में रहा है इस पर देश विरोधी गतिविधियों और दंगे भड़काने जैसे आरोप लगते रहे हैं और पीएफआई के ISIS और सिमी से लिंक होने के सबूत भी मिले थे। इस कारण इस पर सरकार प्रतिबंध लगा चुकी है सरकार ने इस प्रतिबन्ध लगाने के बहुत से अन्य कारण भी बताए हैं।

जो नेता प्रतिबंधित स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के सदस्य थे वो इस संगठन में प्रतिनिधि के रूप में काम करते हुए पाए गये हैं. यह संगठन हमेशा ही खुद को अल्पसंख्यक समुदायों, दलितों और कमजोर वर्गों के लोगों को सशक्त बनाने के लिए काम करने वाला संगठन बताता आया है।

PFI banned for 5 years

2017 में NIA ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखा जिसमे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ( PFI) पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गयी थी। NIA का कहना था कि यह संगठन हिंसक और आतंकी गतिविधियों में शमिल है। NIA के अनुसार यह संगठन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है। यह संगठन मुस्लिमों पर धार्मिक कट्टरता थोपता है तथा लोगो का धर्मपरिवर्तन करवाता है। और यह मुस्लिम लड़को को हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी देता है तथा उन्हें आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए भी उकसाता है। इस संगठन की एक वर्दी भी थी और यह लोग हर साल 15 अगस्त को परेड भी आयोजित करते थे पर 2013 में, केरल सरकार ने पीएफआई की स्वतंत्रता परेड पर प्रतिबंध लगा दिया था।

यह संघठन देश का माहोल बिगाड़ने तथा हिन्दू मुस्लिम के बीच दंगे करवाने के लिए ज़िम्मेदार पाया गया है। यह एक कट्टरपंथी संघठन था जिसके सदस्य केरल से बहुत सारी गन, बम बारूद और हथियारों के साथ हिरासत में भी लिए जा चुके हैं। इससे पहले 1977 में देश में सिमी नाम का संघठन सक्रिय देखा गया था जिस पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के सबुत मिले थे जिस कारण इसे भी 2006 में प्रतिबंधित कर दिया गया था। पीएफआई और सिमी की कार्यप्रणाली एक जैसी ही थी जिस कारण इसे बंद करना जरुरी था। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ( PFI) के आतंकी फंडिंग व अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल पाए जाने के कारण इस पर पांच साल का प्रतिबन्ध लगाया जा चूका है। कहा जाता है कि CAA के विरोध में उत्तरप्रदेश में माहोल खराब करने तथा मुस्लिम बहुल इलाको में दंगे करवाने के पीछे भी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ( PFI) का ही हाथ था।

पीएफआई खुद को सामाजिक संगठन बताता आया है पर यह कभी भी चुनाव में शामिल नही हुआ। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ( पीएफआई ) फण्ड के लिए कई तरीके अपनाता आ रहा है। यह संगठन भारत और विदेशों से अलग-अलग चैनल्स का प्रयोग कर के फंड जुटाता था, और यह संगठन हज यात्रियों की मदद के नाम पर, शराब बेच कर, आतंकवादी संगठनों को पुरानी कारों को बेच कर फण्ड जुटाता आया है, इतने राज्यों में फेले होने के कारण भी यह आसानी से फण्ड का बंदोबस्त कर लिया करता था। विदेशो से भी गेर कानूनी तरीको से फण्ड इकट्ठा करने के आरोप इस संगठन पर लग चुके हैं। जांच एजेंसियो ने पाया की कतर में मोजूद एक कल्चरल फोरम (CAF) संगठन जो पीएफआई संगठन का एक डमी संगठन है जो हमेशा भारत में PFI की मदद करता है और कई बार विदेशों में रहने वाले PFI के सदस्यों ने भी ई-वॉलेट के द्वारा भारत में पैसा भेजा है।

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