उपभोक्ता किसे कहते हैं और उपभोक्ता के अधिकार और उत्तरदायित्व क्या है ?


व्यापार उपभोक्ता पर ही आधारित है, यदि उपभोक्ता ही न हो तो व्यापार का होना भी सम्भव नही है हम आज जानेंगे की उपभोक्ता किसे कहते हैं , उपभोक्ता के अधिकार क्या क्या है और उपभोक्ता के उत्तरदायित्व क्या होते है ? और भी बहुत सी जानकारियाँ जो उपभोक्ता से जुडी हुई है ।

उपभोक्ता किसे कहते हैं?

उपभोक्ता उसे कहा जाता है जो बाज़ार से खरीदी हुई वस्तु को उपभोग यानी की उपयोग करता है, उपभोक्ता वह भी हो सकता है जो बाज़ार से वस्तु ना ख़रीदे पर उसका उपयोग करे जेसे की आपके पिताजी आपके लिए बाइक खरीद कर लाते है पर उसका उपयोग वह नही करते है उसका उपयोग आप करते है तो आप उपभोक्ता कहलाएँगे और यदि कोई स्वयं अपने द्वारा खरीदी गयी वस्तु का उपयोग खुद ही करता है तो वह भी उपभोक्ता ही कहलाता है । उपभोक्ता केवल वस्तुओ का उपयोग नही करता है किसी भी सेवा का उपयोग करने के बाद उसका भुगतान करने वाला व्यक्ति भी उपभोक्ता कहलाता है जेसे आप किसी बस का उपयोग करते है या किसी नाई से बाल कटवाते है या डॉक्टर की दिखाते है जिसके बाद आप उन्हें भुगतान करते है तो इस स्तिथि में भी आप उपभोक्ता ही कहलाते है। कोई भी एसा व्यक्ति जो सामान खरीदने के बाद उसे किसी और को बेचने का काम करता है तो वह उपभोक्ता नही कहताता है उदाहरण के लिए कोई व्यापारी किसी थोक विक्रेता से वस्तु खरीदता है फिर उसे बेचता है तो उसे उपभोक्ता नही कह सकते है। तो आप जान गये होंगे की उपभोक्ता किसे कहते हैं अब उनके अधिकार और उत्तरदायित्व को समझते है ।

भारत में उपभोक्ता अधिकार

वेसे तो व्यापारी कहते है की ग्राहक भगवन का रूप होते है पर आज के समय अधिकतर लोग ग्राहकों के साथ धोका धडी कर देते है जिससे की उसे परेशान होना पड़ सकता है इसीलिए सरकार ने उपभोक्ताओ को कुछ अधिकार दिए है जिससे की उपभोक्ताओ के साथ धोका धडी ना हो। आज के समय सरकारे व्यापार को एक आसन और भरोसेमंद स्थान बना रही है क्योकि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था उसके व्यापार पर ही टिकी हुई है ।

सूचना का अधिकार

उपभोक्ता को सुचना का अधिकार होता है जिसमे की उपभोक्ता के पास यह अधिकार है की वह जो भी वस्तु खरीद रहा है उस वस्तु की गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता, स्तर या श्रेणी तथा मूल्य के सम्बंध में जानने का अधिकार है उस उपभोक्ता को होता है । किसी भी वस्तु को उसकी गुणवता जाने बिना खरीदना उपभोक्ता को हानि पहुचा सकता है इसलिए उपभोक्ता के पास अधिकार है की वह उस वस्तु या सेवा से सम्बन्धी सुचना प्राप्त कर सकता है । कई बार व्यापारी उच्च मूल्यों पर वस्तुए बेचते है जिससे की उपभोक्ता का आर्थिक नुकसान हो जाता है इसलिए उपभोक्ता के अधिकार है की वह वस्तु या सेवा के मूल्य सम्बन्धी जानकारी ले सकता है ।

चयन का अधिकार 

कोई भी उपभोक्ता व्यापारी के कहने पर वस्तु खरीदने के लिए बाध्य नही होता है उपभोक्ता चयन कर अपनी पसंद की चीज खरीद सकता है । कई बार व्यापारी बेकार और घटिया चीज बेचने की कोशिश करते है इससे बचने के लिए उपभोक्ता को चयन का अधिकार दिया जता है । यदि कोई व्यापारी चयन के अधिकार का उलंघन करता है तो उसके खिलाफ कारवाही की जा सकती है।

सुनवाई का अधिकार 

उपभोक्ता को सुनवाई का अधिकार होता है  इस अधिकार में उपभोक्ताओं को अपनी समस्याओ चिंताओं को निर्भयतापूर्वक आगे बढ़ाने और उत्पादों या कंपनियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाने का अधिकार मिलता है । उपभोक्ता अपनी समस्याओ को आसानी से सुलझा सके इसलिए उसे यह अधिकार दिया गया है उसकी समस्या का निवारण हो सके और अगली बार उसे कुछ खरीदने में संकोच ना हो की उसकी बाज़ार सम्बन्धी समस्या का तो निवारण ही नही होता है ।

निवारण का अधिकार

यदि कोई व्यापारी बेकार गुणवत्ता वाली वस्तु या हानि पहुचने वाली वस्तु उपभोक्ता को बेचता है तो उपभोक्ता को यह अधिकार होता है की इन समस्या का निवारण जल्द से जल्द किया जाए यदि एसा नही होता है तो उपभोक्ता न्यायालय भी जा सकता है।

उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार 

इस अधिकार का अर्थ है की उपभोक्ता को ज्ञान और शिक्षा का अधिकार होता है की वह किसी भी उम्र में उपभोक्ता जागरूकता अभियानों से अपने अधिकरो और क्रय सम्बन्धी शिक्षा प्राप्त कर सकता है । यदि उपभोक्ता के पास जानकारियां होगी तो कोई भी व्यापार उसके साथ धोका धडी नही कर पाएगा और अपने अधिकारों का ज्ञान होने के कारण उपभोक्ता बाज़ार में आर्थिक नुक्सान से बचा रहता है।

उपभोक्ता के उत्तरदायित्व

उपभोक्ता को यदि अधिकार प्राप्त है तो उसके कुछ उत्तरदायित्व भी होते है अगर उत्तरदायित्व नही होंगे तो अधिकारों का उपयोग भी सम्भव नही होता है ।

स्वयं सहायता का दायित्व

उपभोक्ता को कम से कम विक्रेता पर निर्भर होना चाहिए उसे धोके से बचने के लिए जितना हो सके उतना जागरूक रहना चाहिए । उपभोक्ता को अपने हितो की रक्षा जितना हो सके उतनी समझदारी से करना चाहिए ।

लेन-देन का प्रमाण

किसी भी वस्तु को खरीदते समय उपभोक्ता का दायित्व होता है की वह लेन देन का प्रमाण ले वरना भविष्य में उसे समस्या आ सकती है । लेन देन का प्रमाण लेने से आशय है की उसे वस्तु का बिल और यदि वारंटी है तो वारंटी कार्ड जरुर लेना चाहिये ।

उचित दावा

उपभोक्ता को यदि विक्रेता द्वारा कोई समस्या आती है तो वे क्षति पूर्ति का दवा कर सकता है पर उसे यह ध्यान रखना होगा की की किया गया दावा उचित हो हानि से बड़ा दावा नही करना चाहिए ।

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