कालसर्प दोष की पूजा कब होती है


आज आप जानेंगे कि कालसर्प दोष क्या है और कालसर्प दोष की पूजा कब होती है?

कालसर्प दोष क्या है?

कालसर्प दोष का पता आपको अपनी कुंडली के द्वारा चलता है, अगर सात ग्रह राहु और केतु के बीच में आ जाते हैं तो काल सर्प दोष हो जाता है। जिस व्यक्ति को कालसर्प दोष होता है उसके जीवन में कई कष्ट बने रहते हैं और वह कई समस्यों से घिरा रहता है। अगर किसी को कालसर्प दोष हो तो वह इसका निवारण कर सकता है इसके लिए उसे कालसर्प दोष की पूजा करनी होती है।

कालसर्प दोष से पीड़ित जातक को साप को दूध अर्पित करना चाहिए, नवनाग स्तोत्र का जाप करना चाहिए, शिवलिंग पर तांबे का नाग-नागिन चढ़ाना चाहिए, तांबे के लोटे में नाग के जोड़े डाल कर बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए, नागपंचमी के दिन जातक अपने घर में राहु यंत्र रखें आदि उपाय से कालसर्प दोष का प्रभाव कम होता है। इस दोष से मुक्त होने के लिए कालसर्प दोष की पूजा करवाना जरुरी है। यह पूजा उज्जैन, त्रिजुगी नारायण मंदिर (उत्तराखंड), त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), त्रीनागेश्वरम वासुकी नाग मंदिर (तमिलनाडु) आदि जगह होती है।

कालसर्प दोष की पूजा कब होती है

कुछ विशेष दिन जैसे अमावस्या तिथि, नागपंचमी, पितृ पक्ष, मास शिवरात्रि के समय कालसर्प दोष की पूजा करना चाहिए, ऐसा करने से कालसर्प दोष ख़त्म हो जाता है ।

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