कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है क्यों?


कृषि को परिभाषित करने की कोई आवश्यकता नही है जैसा हम सभी जानते है खेती को कृषि कहा जाता है। आज के इस लेख में हम आपको बताने वाले है कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है क्यों?

कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है क्यों?

कृषि अधिकांश भारतीय लोगो की आय का साधन है इसीलिए इसे “भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी” कहा जाता है। भारत की आधी से ज्यादा जनसंख्या प्रत्यक्ष रूप से कृषि के माध्यम से पैसा कमाती है। आकड़ो के मुताबिक 60 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आधारित है। इसीलिए भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है, यहाँ की इनती बड़ी आबादी अपना घर चलाने के लिए खेती पर आश्रित है।

खेती केवल खाद्य प्दर्धो के उत्पादन तक ही सिमित नही खेती के लिए आवश्यक उपकरण तथा खाद, बिज आदि का व्यापार भी कृषि से सम्बन्धित अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित है। भारत में किसानो को बहुत ही सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है परन्तु उनकी आवश्यकता की पूर्ति के लिए सरकारे सदा ही उदासीन रही है, बहुत सी योजनाओ के प्रारम्भ करने के बाद भी किसान आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे है। किसानो को आर्थिक रूप से सहायता की जरूरत है परन्तु वे सरकारों के उठाए कदमो से पूर्ण रूप से म्ज्नुत नही हो सके है। कर्ज में दबा किसान आत्महत्या और मानसिक विकारो जैसी समस्याओ से आज भी जूझ रहा है। इतनी ज्यादा जनसंख्या वाला देश यदि इसी तरह अपने किसान भाइयों को खोता रहा तो भविष्य में खाद्य पदार्थो की समस्या आ जाएगी। लोग गावों से पलायन कर नोकरी की तलाश में शहरों की तरफ आ रहे है इसका मुख्य कारण खेती करते समय आ रही समस्याओ का निराकरण ना हो पाना है। परन्तु फिर भी आज की तारिख में अत्यधिक लोग खेती अच्छे से कर रहे और देश के लोगो का पेट भर रहा है।

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