दुसरो की भलाई के लिए किये गए कार्यों को प्राचीन काल में यज्ञ कहा जाता था। ऋषि मुनियों व राजाओं के द्वारा विभिन्न प्रकार के यज्ञों का आयोजन निरंतर रूप से चलता रहता था। यज्ञ वायु को भी शुद्ध करते हैं और साथ ही यज्ञ करके ईश्वर का आशीर्वाद भी प्राप्त किया जाता है। इसी प्रकार का एक यज्ञ रामायण काल में किया गया था जिसे धनुष यज्ञ कहा जाता है। आईये जानें यह क्यों किया गया था एवं धनुष यज्ञ किसके द्वारा आयोजित किया गया?
धनुष यज्ञ किसके द्वारा आयोजित किया गया?
Dhanush Yagya Kiske Dwara Aayojit Kiya Gaya: प्राचीन काल में स्वयंवर के आधार पर राजकुमारियों हेतु योग्य पति खोजे जाते थे। ऐसा ही एक स्वयंवर राजा जनक द्वारा आयोजित किया गया था। राजा जनक, जो की मिथिला के राजा थे उन्होंने अपनी पुत्री के विवाह के लिए यह शर्त रखी थी कि जो वीर भगवान शिव के धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा उसी से उनकी पुत्री का विवाह किया जायेगा। अतः माता सीता के स्वयंवर का नाम धनुष यज्ञ हो गया। जिसका तात्पर्य यह है कि राजा जनक द्वारा धनुष यज्ञ आयोजित किया गया।
क्या है सीता स्वयंवर की कथा?
राजा जनक के पास शिव धनुष था और उन्होंने यह प्रतिज्ञा ली थी कि जो भी इस धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाएगा केवल उसी से वे अपनी पुत्री का विवाह करवाएंगे। जब स्वयंवर का आयोजन किया गया तो धरती के कई वीर इसमें सम्मिलित होने आये।
मुनि विश्वामित्र को भी जनक द्वारा आमंत्रित किया गया था। उन्होंने धनुष यज्ञ से एक दिन पूर्व दोनों भाइयों (राम व लक्ष्मण) को सुचना दी थी कि कल जनकपुरी के राजा जनक की बेटी का स्वयंवर है। वहाँ हम जायेंगे।
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जनक द्वारा दिए गए निमंत्रण अनुसार मुनि विश्वामित्र दोनों भाई राम और लक्ष्मण को ले कर जनकपुरी पहुंचते हैं। स्वयंवर शुरू होता है एवं जनक घोषणा करते हैं जो भी इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा वही मिथिला की राजकुमारी का वर होगा। उसके पश्चात सारे राजा एक-एक कर आगे आते हैं पर कोई भी धनुष को हिला तक नहीं पाता! जिसे देख जनक निराष हो कर कहते हैं कि मुझे नहीं पता था की धरती वीरों से खाली हो गयी है, क्या इस धरती पर कोई ऐसा वीर नहीं है जो इस शिव धनुष को हिला भी सके? इस पर प्रत्यंचा चढ़ा सके?
राजा जनक की बात सुनकर लक्ष्मण अत्यधिक क्रोधित हो कर कहते हैं कि विश्वामित्र और मेरे बड़े भाई की आज्ञा हो तो यह धनुष तो क्या यह पूरे ब्रह्मांड को मैं गेंद की तरह उछाल दूं। लक्ष्मण को क्रोधित देख राम ने उन्हें बैठने का आदेश दिया। उसके पश्चात राम विश्वामित्र की आज्ञा ले कर धनुष की ओर बढ़े। यह देख वहाँ बैठे समस्त राजा श्री राम का मज़ाक उड़ाते हुवे कहने लगे कि जिस धनुष को यहाँ बैठे बड़े बड़े वीर नहीं हिला पाए उसे यह लड़का कैसे उठाएगा?
श्री राम धनुष के पास गए, उन्होंने सर्वप्रथम उसे नमन किया फिर बड़ी ही सरलता से धनुष को उठा लिया। मगर जैसे ही वे प्रत्यंचा चढ़ाने लगे, धनुष टूट गया! यह दृश्य देख राजा जनक समेत पुरे मिथिलावासियो में एक ख़ुशी की लहर दौड़ गयी। उसके बाद धूम-धाम से विवाह का आयोजन किया गया।
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