गायत्री मंत्र का अर्थ, लाभ तथा सावधानियां


गायत्री मंत्र सर्वश्रेष्ठ मंत्र है। हिंदू धर्म में मां गायत्री की पूजा-आराधना की जाती है। हर किसी को प्रतिदिन इनकी पूजा अर्चना के साथ गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। कहा जाता है कि मंत्र में इतनी ऊर्जा है कि प्रतिदिन तीन बार इस महामंत्र का जप करने से सारी समस्याएँ नष्ट हो जाती हैं, इस गायत्री मंत्र का जाप करने से शरीर के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हमे मंत्र का जाप दिन में तीन बार अवश्य करना चाहिए, मन के दुख, द्वेष, पाप, भय, का नाश होता है, इस मंत्र के जाप से कई चमत्कारी लाभ भी मिलते हैं। आइये जानते हैं कि गायत्री मंत्र क्या है तथा गायत्री मंत्र का अर्थ क्या है?

गायत्री मंत्र क्या है?

गायत्री मंत्र – ‘ॐ भूर्भव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।’

गायत्री मंत्र का अर्थ

उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, पापनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें। और यह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे अर्थात इस मंत्र के जाप से बौद्धिक क्षमता तथा मेधा शक्ति और स्मरण की क्षमता बढ़ती है। साथ ही इंसान को दुःखों से छूटने का रास्ता भी मिलता है।

गायत्री मंत्र जप करते समय सावधानी

इस मंत्र का जाप रात के समय नहीं किया जाता है।
गायत्री मंत्र के जप में तुलसी और चंदन की माला का उपयोग किया जाता है।
हमे आसन पर बैठकर ही गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए।

मंत्र का जाप करने का उचित समय

हर किसी को इस मंत्र का जाप दिन में तीन बार अवश्य करना चाहिए। सबसे पहले सूर्य निकलने से पहले। फिर दूसरा समय दोपहर में होता है। तथा फिर शाम को सूर्यास्त के कुछ देर पहले इस मंत्र का जाप करना चाहिए। इस मंत्र के कई लाभ है, गायत्री मंत्र का जाप करने से व्यक्ति का स्वभाव शांत और आकर्षक होने लगता है।

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