कर्पूर गौरम करुणावतारं मंत्र का अर्थ


हिन्दू धर्म इस संसार का सबसे प्राचीन धर्म है जिसमे अनेक देवी देवताओं की पूजा की जाती है, और इस धर्म में कई संस्कृत भाषा में मोजूद मंत्र भी है जिनका उपयोग पूजा पाठ में किया जाता है। हर देवता के लिए अलग अलग मंत्र है पर हर पूजा के बाद कर्पूर गौरम करुणावतारं मंत्र का जाप किया जाता है। तो आइये जानते हैं कि कर्पूर गौरम करुणावतारं मंत्र का अर्थ क्या है तथा क्या है इसका महत्व?

कर्पूर गौरम करुणावतारं मंत्र का अर्थ – Karpur gauram mantra meaning in hindi

इस मंत्र में भगवान भोलेनाथ की स्तुति की गयी है। इस मंत्र का अर्थ है –

कर्पूरगौरं – कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले।

करुणावतारं – करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं।

संसारसारं – समस्त सृष्टि के जो सार हैं।

भुजगेंद्रहारम् – जो सांप को हार के रूप में धारण करते हैं।

सदा वसतं हृदयाविन्दे भवंभावनी सहितं नमामि – भगवान शिव माता पार्वती सहित मेरे ह्रदय में सदैव निवास करें और उन्हें मेरा नमन है।

कर्पूर गौरम करुणावतारं मंत्र का महत्व

हर आरती या पूजा के बाद इस मंत्र का जाप किया जाता है क्योकि इस मंत्र को सर्वप्रथम भगवान विष्णु ने भगवान शंकर तथा पार्वती के विवाह में उपयोग किया था। इस मंत्र स्तुति बताती है कि भगवान शंकर इस संसार क्वे अधिपति है वही मृत्यु लोक के देवता है यही संसार में मोजूद हर पशु आदि के देवता है, वह श्मसान के वासी है तथा मृत्यु के डर को दूर करते हैं। वह केवल बहुत भयंकर और अघोरी वाला स्वरूप नही रखते हैं उनका स्वरुप बहुत दिव्य माना गया है।

आशा करता हु आप karpur gauram ka hindi arth समझ गये होंगे, जानकारी अच्छी लगे तो शेयर भी करे।

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