समय चक्र क्या है?


नमस्कार दोस्तों! हम सभी जानते हैं कि समय किसी के लिए नही रुकता है यह निरंतर चलता ही रहता है, कभी भी हम बीते हुए समय में वापस नही जा सकते हैं समय का चक्र कुछ होता ही ऐसा है। आइये समय चक्र के बारे में और अधिक जानतें है और साथ ही हम जानेंगे की समय चक्र क्या है?

समय चक्र क्या है?

कालचक्र या समय चक्र वह ज्ञान है जिसमे अनेक परम्पराओं जैसे ज्योतिष विज्ञान, ब्रह्मांड विज्ञान, समाजशास्त्र, दर्शन,धर्मशास्त्र, मिथक, भविष्यवाणी , चिकित्सा का समावेश है। सनातन धर्म हो या बोद्ध धर्म समय चक्र के बारें में अधिकांश धर्मो में समय चक्र या काल चक्र के बारे में बहुत अधिक लिखा गया है। बौद्ध खगोल विज्ञान की मने तो ब्रह्मांड का एक पूरा चक्र चार अवस्थाओं से बना हुआ होता है जो शून्य, रूप, अवधि और विनाश है। बौद्ध ग्रंथों की मान्यताओ के अनुसार कालचक्र तीन प्रकार के होते हैं पहला बाहरी कालचक्र, दुसरा आंतरिक कालचक्र और तीसरा वैकल्पिक कालचक्र।

समय चक्र क्या है?

सनातन धर्म में यह माना जाता है की काल की सबसे छोटी इकाई परमाणु होती है जन दो परमाणु मिलते हैं तब 1 अणु बनता है, 3 अणु से 1 त्रसरेणु, 3 त्रसरेणु से 1 त्रुटी का निर्माण होता है, 100 त्रुटी से एक वेध बनता है, 3 वेध से 1 लव और 3 लव से 1 क्षण बनता है, फिर 3 क्षण से 1  काष्ठा, 15 काष्ठा मिलाकर एक लघु, 15 लघु से एक नाडिका, 2 नाडिका से एक मुहर्त बनता है तथा 6 नाडिका मिलाकर एक प्रहर बनाती है। 1 दिन ओए रात में कुल 8 प्रहर होते हैं। एक माह में दो पक्ष होते है एक पक्ष को शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष कहलाता है। एवं पुरे वर्ष में 12 माह होते हैं अर्थात 12 माह मिल कर एक वर्ष बनाते हैं। हिन्दू धर्म में माह क्रमशः चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन है। कालचक्र एवं समय चक्र वह स्थिति है जो कभी स्थिर नही रहती है, कालचक्र एवं समय चक्र निरंतर भविष्य की और बढ़ते रहते हैं ।

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