या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता मंत्र का अर्थ


माँ दुर्गा का पर्व नवरात्रि हर वर्ष बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है, इस पर्व के बीच आपने या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता मंत्र तो जरुर सुना होगा, यह मंत्र दुखो और कष्टों का नाश करता है क्या जानते हैं या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता मंत्र का अर्थ क्या होता है अगर नही तो इस लेख में आपको इस मन्त्र का अर्थ मिल जाएगा।

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता मंत्र का अर्थ

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

जो देवी संसार के सभी प्राणियों में शक्ति रूप में स्थित हैं, उस देवी को नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार करता हूँ।

या देवी सर्वभूतेषु मातृ रूपेना संस्थित ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

हे सर्वव्यापी देवी माँ दुर्गा जो एक माँ के समान संसार के सभी प्राणियों का पालन-पोषण किया है, मैं उस देवी को नमन करता हूं और आपकी प्रशंसा करता हूं, मैं इस देवी का पुन: सम्मान करता हूं एवं आपको बारंबार नमस्कार है।

या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

जो देवी माँ इस संसार के सभी प्राणियों में चेतना कहलाती हैं, उस माता को में नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार करता हूँ।

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी माँ इस दुनिया के प्राणियों में बुद्धि के रूप से स्थित हैं, उनको में नमस्कार बारंबार नमस्कार करता हूँ।

या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी माँ इस जग के सभी प्राणियों में लज्जा रूप से स्थित हैं, उनको मेरा नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार है ।

या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

वह देवी जो सब प्राणियों में शान्ति के रूप से विद्यमान हैं, उनको नमस्कार, बारंबार नमस्कार है ।

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी माँ इस जगत के प्राणियों में लक्ष्मी के रूप से स्थित हैं, उस माता को में नमस्कार करता हु, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार करता हु।

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी माँ इस जगत के प्राणियों में दया रूप से विद्यमान हैं, उस माता को में नमस्कार करता हु, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार करता हु।

या देवी सर्वभुतेषु बुद्धि रूपेण थिथिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

जो देवी सभी प्राणियों में बुद्धि के रूप में विद्यमान हैं, उस माता को में नमस्कार करता हु, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार करता हु।

या देवी सर्वभूतेषु तृष्णा-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी माँ इस जग के सभी प्राणियों में चाहत के रूप में विद्यमान हैं, उस माता को में नमस्कार करता हु, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार करता हु।

या देवी सर्वभूतेषु क्षुधा-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी माँ इस जगत के सभी प्राणियों में भूख के रूप में विद्यमान हैं, उस माता को में नमस्कार करता हु, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार करता हु।

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टि-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी माँ इस जग के सभी प्राणियों में सन्तुष्टि के रूप में विद्यमान हैं, उस माता को में नमस्कार करता हु, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार करता हु।

या देवी सर्वभूतेषु निद्रा-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

यानी जो देवी माँ इस जग के सभी प्राणियों में आराम के रूप में उस माता को में नमस्कार करता हु, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार करता हु

या देवी सर्वभूतेषु विद्या-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी माँ इस जग के सभी प्राणियों में विद्या के रूप में स्थित हैं, उस माता को में नमस्कार करता हु, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार करता हु।

या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धा-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी माँ इस जग के सभी प्राणियों में श्रद्धा, आदर, सम्मान के रूप में विद्यमान हैं, उस माता को में नमस्कार करता हु, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार करता हु।

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते॥

हे देवी आप ही इस जगत को मंगल प्रदान करने वाली मंगल मयी देवी हो आप ही सब धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को आदि सिद्ध करने वाली हो. तीन नेत्रों वाली गौरी हो. हे , तुम्हें नमस्कार करता हु।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी माँ इस जग के सभी प्राणियों का पालन-पोषण करती है मैं उस देवी को नमन करता हूं, मैं आपकी प्रशंसा करता हूं, मैं पुन: आपका सम्मान करता हूं आपको बारंबार नमस्कार करता हु।

या देवी सर्वभूतेषु सृष्टि रूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी माँ इस संपूर्ण सृष्टि में विद्यमान है तथा रचयिता है उस माता को में नमस्कार करता हु, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार करता हु।

या देवी सर्वभूतेषु भक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी माँ इस जगत के सही प्राणियों में भक्ति, निष्ठा, अनुराग के रूप में विद्यमान हैं, उस माता को में नमस्कार करता हु, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार करता हु।

या देवी सर्वभूतेषू क्षान्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी माँ इस जग के सभी प्राणियों में सहनशीलता और क्षमा के रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।

या देवी सर्वभूतेषू जाति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी माँ इस जग के सभी प्राणियों में जाति और जन्म के रूप में स्थित हैं, उस माता को में नमस्कार करता हु, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार करता हु।

या देवी सर्वभूतेषू कान्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
भावार्थ

जो देवी माँ इस जग के सभी प्राणियों में तेज, दिव्यज्योति, उर्जा रूप में विद्यमान हैं, उस माता को में नमस्कार करता हु, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार करता हु।

या देवी सर्वभूतेसु विष्णुमयति सबदिता।
नमस्तसयै, नमस्तसयै, नमस्तसयै, नमो नमः।

विष्णु माया (मोह) शब्द को जानने वाली हे उस देवी माता को में नमस्कार करता हु, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार करता हु।

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